
हर इंसान की ज़िंदगी एक अनकही किताब होती है, जिसके कुछ पन्ने आँसुओं से भरे होते हैं, कुछ पसीने से और कुछ जीत के इत्र से महकते हैं। मेरी कहानी भी कुछ ऐसी ही है।
मैं मुकेश कुमार, आज एक पोस्ट ग्रेजुएट और एक्सपर्ट कंप्यूटर टीचर हूँ। लेकिन मेरी यात्रा सीधी नहीं थी। एक समय था जब मैं 8वीं कक्षा में फेल हो गया था। एक बच्चा जिसे पढ़ाई में कोई रुचि नहीं थी, वही आज सैकड़ों छात्रों को कंप्यूटर की दुनिया में सफलता की राह दिखा रहा है।
यह कहानी है मेरे आत्मविश्वास, संघर्ष और सपनों की, और उस मिट्टी की जहाँ से मैंने ताकत पाई – बिहार का मेरा गाँव।
बचपन की कहानी – चंडीगढ़ से शुरू हुआ संघर्ष
मेरा बचपन Hallomajra, Chandigarh में बीता। वहाँ के Government High School से मैंने पढ़ाई की शुरुआत की। घर की स्थिति साधारण थी – ना कोई खास सुविधा, ना कोई विशेष वातावरण पढ़ाई का। बचपन में पढ़ाई मेरी प्राथमिकता नहीं थी। मैं एक सामान्य लड़का था जिसे बाहर खेलना, मस्ती करना ज्यादा पसंद था।
और परिणाम ये हुआ कि मैं 8वीं कक्षा में फेल हो गया।
वो समय मेरे जीवन का सबसे कठिन समय था। टीचर्स से लेकर रिश्तेदारों तक, सबका ताना सुनना पड़ा। खुद से भी नज़रें नहीं मिला पाता था। लेकिन इसी समय ने मुझे एक अहम निर्णय लेने पर मजबूर किया – मैं वापस अपने गाँव, बिहार जाऊँगा।
बिहार वापसी – गाँव की मिट्टी में नया बीज
मेरे पापा का पैतृक गाँव बिहार में था। वहीँ मेरा बचपन कुछ सालों तक बीता था और मेरा मन हमेशा उस मिट्टी से जुड़ा रहा। इसलिए जब चंडीगढ़ में हिम्मत टूटने लगी, मैंने अपने गाँव लौटने का फैसला लिया।
गाँव की जिंदगी अलग थी – बिजली का संकट, सीमित संसाधन, लेकिन एक आत्मीयता और सच्चाई थी वहाँ।
यही वो जगह थी जिसने मुझे फिर से उठने की ताकत दी। मैंने गाँव के सरकारी स्कूल में दाखिला लिया और खुद को एक बार फिर से पढ़ाई में झोंक दिया। अब मैं सिर्फ पास नहीं होना चाहता था – मुझे सफल होना था।
पढ़ाई का दूसरा अध्याय – बिहार से स्नातक और फिर पोस्ट ग्रेजुएशन
बिहार में रहते हुए मैंने मेहनत से 10वीं और 12वीं पूरी की। ये वही लड़का था जो कभी किताबों से भागता था – लेकिन अब हर दिन 6–8 घंटे पढ़ाई करता था।
Graduation मैंने वहीं से पूरी की – और जब मेरे हाथ में मेरी डिग्री थी, मेरी आँखों में आँसू थे। ये सिर्फ एक कागज़ का टुकड़ा नहीं था, ये मेरी जीत का प्रमाण था।
मैंने यहाँ नहीं रुका। मैंने Post Graduation में दाखिला लिया और मेहनत जारी रखी। आज मेरे पास एक पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री है – जो मेरे उस पुराने “8वीं फेल” टैग को मिटा चुकी है।
फिर से वापसी चंडीगढ़ की – अब कुछ बड़ा करना था
Post Graduation के बाद मैं फिर से चंडीगढ़ लौट आया – लेकिन इस बार हालात अलग थे। अब मैं एक शिक्षित, आत्मविश्वासी और संघर्षशील युवा था।
मैंने खुद से एक वादा किया – अब मैं खुद को साबित करूँगा, अब मैं किसी और की नज़रों में नहीं, बल्कि अपनी नज़रों में सफल बनूँगा।
कंप्यूटर से पहला रिश्ता – शौक से जुनून तक
चंडीगढ़ में रहते हुए मेरी मुलाकात कंप्यूटर से हुई। शुरू में ये सिर्फ एक उत्सुकता थी – लेकिन जब मैंने एक बार टाइपिंग शुरू की, ग्राफिक डिज़ाइन देखा, कोडिंग सीखी – तो ये एक जुनून बन गया।
मैंने खुद से सीखा – इंटरनेट, यूट्यूब, फ्री कोर्सेज, ई-बुक्स और जो कुछ भी मुझे मिल सकता था, उसका भरपूर उपयोग किया। मुझे किसी इंस्टिट्यूट या क्लास की ज़रूरत नहीं पड़ी – मेरी क्लास मेरा संघर्ष था, मेरा अभ्यास था।
अब मैं दूसरों को सिखा सकता हूँ – ये अहसास
जब मैंने खुद को कई कंप्यूटर टूल्स में एक्सपर्ट पाया, तो मैंने पहला स्टूडेंट पढ़ाया। वो एक छोटा बच्चा था जिसे MS Office सिखाया। जब उसने कुछ हफ्तों बाद खुद PPT बनाकर मुझे दिखाया, मैं रो पड़ा।
मुझे अहसास हुआ – अब मैं सिखा सकता हूँ।
खुद का कंप्यूटर सेंटर – जहाँ से असली उड़ान शुरू हुई
मैंने कुछ पैसे जोड़े, नया सिस्टम खरीदा, और चंडीगढ़ में अपना पहला Computer Institute शुरू किया। नाम कोई बड़ा नहीं था।, लेकिन इरादा बड़ा था।
शुरुआत में कोई नहीं आता था, दिनभर खाली बैठा रहता था। लेकिन एक दिन एक छात्रा आई – उसकी आँखों में डर था, लेकिन सीखने की चाहत भी थी। मैंने उसे पूरे दिल से सिखाया।
कुछ महीनों में मेरी क्लास भरने लगी। फिर वो क्लास दो शिफ्ट में चली, फिर मैंने दूसरे कंप्यूटर खरीदे, और आज मेरे पास दर्जनों छात्र हर महीने आते हैं।
मेरे कोर्स और ट्रेनिंग
मैंने अपने सेंटर पर कई कोर्स शुरू किए:
- Basic Computer Training
- Advance Excel & Office
- Graphic Designing
- Web Designing (HTML, CSS, JS)
- Digital Marketing
- Typing & Data Entry
- Tally & Accounting
हर कोर्स मैं खुद डिजाइन करता हूँ – मेरी कोशिश होती है कि 100% प्रैक्टिकल और नौकरी-उपयोगी ज्ञान दूं।
मेरे छात्र – मेरी असली पूंजी
आज मेरे पढ़ाए हुए छात्र:
- किसी कंपनी में डिजिटल मार्केटर हैं,
- कोई सरकारी नौकरी में क्लर्क है,
- कोई फ्रीलांसर बन चुका है,
- और कोई खुद का बिज़नेस चला रहा है।
जब वो मुझसे कहते हैं – “सर, आप ना होते तो हम कुछ नहीं कर पाते” – उस दिन मुझे लगता है कि मेरा सपना पूरा हो गया।
मेरी पहचान – एक प्रेरणास्त्रोत शिक्षक
आज मैं सिर्फ कंप्यूटर टीचर नहीं हूँ, मैं एक प्रेरणास्त्रोत बन चुका हूँ। मेरे जैसे कई युवा आज भी हार मान लेते हैं – लेकिन जब मेरी कहानी सुनते हैं, तो उनमें फिर से जीने और सीखने की ललक जागती है।
मैं उन्हें सिखाता हूँ –
- हारना ठीक है,
- लेकिन रुक जाना नहीं।
मेरा सपना – डिजिटल इंडिया में गाँवों का योगदान
मेरा अगला लक्ष्य है – गाँव-गाँव कंप्यूटर शिक्षा पहुँचाना। मैं चाहता हूँ कि बिहार, झारखंड, यूपी जैसे राज्यों के गाँवों में भी हर बच्चा डिजिटल हो। मैं वहाँ कंप्यूटर की वैन ले जाना चाहता हूँ, फ्री क्लास देना चाहता हूँ।
युवाओं के लिए मेरा संदेश
- असफलता का मतलब अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है।
- डिग्री से ज़्यादा ज़रूरी है कौशल (Skill)।
- हर दिन कुछ नया सीखें।
- मोबाइल और सोशल मीडिया से समय निकालकर सीखने में लगाएं।
- खुद पर भरोसा रखें – क्योंकि अगर मुकेश कुमार कर सकता है, तो आप भी कर सकते हैं।
निष्कर्ष: मेरी हार, मेरी जीत बनी
आज जब मैं अपने उस पुराने स्कूल के सामने से गुजरता हूँ जहाँ मैं 8वीं में फेल हुआ था – मैं मुस्कराता हूँ। क्योंकि उस हार ने मुझे वो बना दिया, जो मैं आज हूँ।
मैं मुकेश कुमार – एक गाँव का बेटा, एक फेल छात्र, एक संघर्षशील इंसान और आज एक एक्सपर्ट कंप्यूटर शिक्षक।
मेरी कहानी अधूरी नहीं, लेकिन अभी खत्म भी नहीं हुई। मैं अभी भी सीख रहा हूँ, सिखा रहा हूँ और समाज के लिए योगदान देने की कोशिश कर रहा हूँ।
अगर मेरी कहानी ने आपको कुछ सिखाया हो, तो कृपया इसे अपने दोस्तों, परिवार, और उन सभी युवाओं तक पहुँचाइए जो आज खुद को असफल मानते हैं।
क्योंकि एक असफलता, आपका भविष्य नहीं तय करती – आपकी मेहनत करती है।

